George Fernandes/नहीं रहे जॉर्ज फर्नान्डिस; एक वक्त इंदिरा गांधी के लिए चुनौती बने थे, जानिए इस नेता से जुड़े कुछ विवाद - Breaking News Today: Aaj ka breaking news

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29 जन॰ 2019

George Fernandes/नहीं रहे जॉर्ज फर्नान्डिस; एक वक्त इंदिरा गांधी के लिए चुनौती बने थे, जानिए इस नेता से जुड़े कुछ विवाद

नई दिल्ली. George Fernandes passes away: पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नान्डिस का मंगलवार को 88 साल की उम्र में निधन हो गया। वो काफी वक्त से अल्जाइमर्स से पीड़ित थे। इस बीमारी में रोगी को कुछ भी याद नहीं रहता। जॉर्ज फर्नान्डिस को एक जुझारू और सादगी पसंद नेता के रूप में जाना जाता है। वो देश के पूर्व रक्षा मंत्री (Former defence minister George Fernandes) भी रहे। जॉर्ज फर्नान्डिस को कई चीजों के लिए याद किया जाएगा। वो मुखर वक्ता था और अपनी बात बिना किसी लाग लपेट के कहते रहे। यही वजह रही कि उनका नाम कई बार विवादों में भी घिरा। आपातकाल के दौरान जॉर्ज इंदिरा गांधी के लिए चुनौती बन गए थे। उस दौर में उनका सरकार के साथ काफी विवाद रहा और वो अंडरग्राउंड रहकर अपने काम को अंजाम देते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी फर्नांडीज के निधन पर शोक व्यक्त किया है।कहां हुआ था जन्म?जॉर्ज फर्नान्डिस हिंदीभाषी नहीं थे लेकिन मातृभाषा पर उनकी पकड़ काफी मजबूत रही। जॉर्ज फर्नान्डिस का जन्म 1930 में कर्नाटक के मंगलौर में हुआ। कहा जाता है कि परिवार उन्हें पादरी बनाना चाहता था लेकिन जॉर्ज का मन इस काम में नहीं लगता था। वो पहले बेंगलुरू गए और फिर 1949 में मुंबई आ गए। यहीं से उनकी राजनैतिक यात्रा भी शुरू होती है। वो डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आए और टैक्सी यूनियन के नेता बने। अब तक एक सशक्त नेता के रूप में उनकी पहचान बन चुकी थी।रेल हड़तालआजादी के बाद रेलवे कर्मचारियों के वेतन में कोई बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। इसको लेकर कर्मचारियों में आक्रोश तो था लेकिन सही नेतृत्व का अभाव भी था। 1973 में जॉर्ज फर्नान्डिसऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के प्रेसिडेंट बने। उनकी पहल का असर ये हुआ कि टैक्सी यूनियन और ट्रांसपोर्ट यूनियन भी उनके आंदोलन से जुड़ गईं। 1974 में उन्होंने हड़ताल का ऐलान किया और करीब 15 लाख रेलवे कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इस घटना के बाद वो देशभर में एक बड़े नेता के तौर पर पहचान बना चुके थे। इसी दौरान आपातकाल यानी इमरजेंसी लगी। जॉर्ज फर्नान्डिस ने इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया। कहा जाता है कि वो पुलिस और तमाम सरकारी एजेंसियों को चकमा देने में सफल रहे और उन्हें एक साल तक गिरफ्तार ही नहीं किया जा सका। इस दौरान वो भेष बदलकर घूमते थे।जेल से चुनाव लड़ाआपातकाल के बाद जॉर्ज फर्नान्डिस ने जेल से ही चुनाव लड़ा और बड़ी जीत भी दर्ज की। मोरारजी देसाई सरकार में मंत्री बने। इसके बाद वीपी सिंह सरकार में वो रेल मंत्री रहे। भाजपा और आरएसएस का विरोध करने वाले जॉर्ज अटल बिहारी वाजपेयी के गैर राजनीतिक मित्र माने जाते थे। एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने भाजपा से गठबंधन भी किया। रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने काफी काम किया लेकिन तहलका विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया। इसके पहले 1994 में वो समता पार्टी बना चुके थे। ये कदम उन्होंने जनता दल और लालू की आरजेडी के विरोध में उठाया था।चीन सबसे बड़ा दुश्मनजॉर्ज फर्नान्डिस ने एक बार कहा था- मैं सत्ता में रहूं या विपक्ष में, लेकिन जो सच है सिर्फ वही बोलूंगा। यही वजह है कि एक बार उन्होंने कहा- भारत का सबसे बड़ा दुश्मन चीन है। इस पर काफी विवाद हुआ। चीन ने विरोध भी दर्ज कराया। रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने तत्कालीन नेवी चीफ एडमिरल विष्णु भागवत को बर्खास्त कर दिया था। करगिल युद्ध के दौरान जॉर्ज ने कहा था- इस जंग के लिए पाकिस्तान की सरकार नहीं बल्कि सेना जिम्मेदार है। कहा जाता है कि उनके बयानों की वजह से सरकार को परेशानी उठानी पड़ती थी। एक बार जॉर्ज ने खुद माना था कि वो सत्ता में रहकर भी कार्यकर्ता की तरह सोचते और काम करते हैं। वाजपेयी ने उन्हें एनडीए में संयोजक भी बनाया और इसका सरकार को काफी फायदा भी हुआ। जॉर्ज फर्नान्डिस ने तीन किताबें भी लिखी हैं। ये तीनों ही अंग्रेजी में हैं।

from Dainik Bhaskar http://bit.ly/2HPwqN5

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