नई दिल्ली. हिंदू धर्म में अमावस्या (New Moon) और पूर्णिमा (Full Moon) का खास महत्व होता है। काफी श्रद्धा और आदर से जुड़े दिन होते हैं ये...इन दिनों लोग व्रत करते हैं, दान करते हैं, पूजा करते हैं...चंद्रमा और सूर्य को निमित अमावस्या और पूर्णिमा के अलावा हिंदू धर्म में एकादशी को भी खास स्थान प्राप्त है। एकादशी के महत्व का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कहा जाता है ये व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लिहाज़ा भगवान विष्णु को समर्पित इस दिन को बेहद ही आदर के साथ देखा जाता है। हर महीने में दो बार एकादशी होती है और इस बार जो एकादशी पड़ने जा रही है वो बेहद ही खास होने वाली है। जी हां...इस बार षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) है जिसे हिंदू धर्म में बेहद ही खास माना जाता है। ये एकादशी कब है...इसका क्या महत्व है...इस व्रत की पूजा विधि और व्रत कथा। सभी कुछ लोग जानना चाहते हैं लिहाज़ा इस षटतिला व्रत से जुड़ी पूरी जानकारी हम आपको दे रहे हैं।कब है षटतिला एकादशी ?कई लोग में षटतिला एकादशी को लेकर विरोधाभास है लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि ये एकादशी 31 जनवरी, 2019 को है। 1 फरवरी को द्वादशी होगी लिहाज़ा 31 जनवरी को व्रत के बाद 1 फरवरी यानि द्वादशी को ब्राह्मण को दान देंषटतिला एकादशी पूजा विधि-कहते हैं एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है लिहाज़ा इस दिन नहा धोकर सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा और ध्यान करें।-अगले दिन द्वादशी पर सुबह सवेरे नहा धोकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और फिर ब्राह्मणों को भोजन कराएं -अगर ब्राह्मणोंं को भोजन कराने मे समर्थ ना हो तो एक ब्राह्मण के घर सूखा सीधा भी दिया जा सकता है।-सीधा देने के बाद खुद अन्न ग्रहण करें।षटतिला एकादशी पर तिल का है खास महत्वषटतिला एकादशी के नाम के समान ही इस दिन तिल का खास महत्व होता है। अपनी दिनचर्या में इस दिन तिल के इस्तेमाल पर ध्यान दें, तिलों को दान करें इसका बेहद ही पुण्य मिलता है।-इस दिन तिल के जल से नहाएं।-पिसे हुए तिल का उबटन लगाएं।- तिलों का हवन करें- तिल वाला पानी पीए-तिलों का दान दें।-तिलों की मिठाई बनाएंषटतिला एकादशी की व्रत कथाभगवान विष्णु ने एक दिन नारद मुनि को षटतिला एकादशी व्रत की कथा सुनाई थी जिसके मुताबिक प्राचीन काल में धरती पर एक विधवा ब्राह्मणी रहती थी। जो मेरी बड़ी भक्त थी और पूरी श्रद्धा से मेरी पूजा करती थी। एक बार उस ब्राह्मणी ने एक महीने तक व्रत रखा और मेरी उपासना की। व्रत के प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया लेकिन वो ब्राह्नणी कभी अन्न दान नहीं करती थी एक दिन भगवान विष्णु खुद उस ब्राह्मणी के पास भिक्षा मांगने पहुंचे। जब विष्णु देव ने भिक्षा मांगी तो उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर देे दिया। तब भगवना विष्णु ने बताया कि जब ब्राह्मणी देह त्याग कर मेरे लोक में आई तो उसे यहां एक खाली कुटिया और आम का पेड़ मिला। खाली कुटिया को देखकर ब्राह्मणी ने पूछा कि मैं तो धर्मपरायण हूं फिर मुझे खाली कुटिया क्यों मिली? तब मैंने बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने के कारण हआ है। तब भगवान विष्णु ने बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं तब आप अपना द्वार तभी खोलना जब वो आपको षटतिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं। तब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का व्रत किया और उससे उसकी कुटिया धन धान्य से भर गई।
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29 जन॰ 2019
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जानें कब है षटतिला एकादशी का व्रत, जानें तिल के दान का महत्व, पूजा विधि और षटतिला एकादशी व्रत कथा
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