इंदौर में पानी के पाउच के साथ जा रहे सैंपल; पब्लिक टॉयलेट के पानी से धोई जा रही एम्बुलेंस मध्य प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए जुगाड़ व्यवस्था चलाई जा रही है।इंदौर में जांच के लिएकोरोना सैंपल जैल वाले आइस पैक की जगह पानी के ठंडे पाउच के बीच रखकर भेजे जा रहे हैं।वहीं,कोरोना के पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों काे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली 108 एम्बुलेंस को सार्वजनिक शौचालय की टंंकी के पानी से धोया जा रहा है। उधर, श्योपुर जिलेके कंटेनमेंट जाेन में पुलिस दाे दिन से लाेगाें कोशौच के लिए बाहर नहीं जाने दे रही, जबकि यहां करीब 95%घराें में पक्केशौचालय नहींहैं। आईस पैक खरीदे ही नहीं इंदौर में कोरोना जांच के लिएस्वास्थ्य विभाग नेसैंपल कलेक्शन के लिए जैल वाले आइस पैक की खरीदी ही नहीं की। वैक्सीनेशन के लिए मिले आइस पैक से ढाई महीने तक काम चलाया। स्टॉक में जितना था, उतना उपयोग करने के बाद स्वास्थ्य केंद्रों से मंगवाने लगे। अब कमी हुई तो जुगाड़ से काम चला रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सैंपल जैलपैक में जाए डब्ल्यूएचओ के अनुसारनाक और गले से स्वाब का सैंपल लेने के बाद उसे शीशी में सील करना होता है। शीशी कंटेनर में रखी जाती है। कंटेनर को जिप लॉक वाले प्लास्टिक के पैकेट में रखकर जार में रखा जाता है। कोरोेना सैंपल को ठंडा रखने के लिए जार काे जैल आइस पैक वाले थर्मोकोल बॉक्स में रखना होता है। जिसका तापमान 2 से 8 डिग्री के बीच रहे। शौचालय के पानी से धो रहे एम्बुलेंस इंदौर में दूसरी लापरवाही कोरोना के पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों काे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली 108 एम्बुलेंस को लेकर सामने आई है। हाल में अमेरिका से लौटे लोगों को लेने के लिए एम्बुलेंस एयरपोर्ट पर पहुंची तो उन्होंने एम्बुलेंस में धूल और गंदगी पर आपत्ति ली। तब पता चला कि एम्बुलेंस को सोडियमहाइपो क्लोराइटकी बजाय शौचालय के पानी से धोया जाता है। स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम का कहना है एम्बुलेंस का संचालन करने वाली जिगित्सा हेल्थकेयर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। फोटो इंदौर एयरपोर्ट के पास की है। यहां सार्वजनिक शौचालय की टंंकी के पानी से एम्बुलेंस को धोया जा रहा है। एनएचएम की गाइडलाइन के अनुसार एम्बुलेंस को रोज धोना चाहिए। इसके लिए 1 से 2 प्रतिशत सोडियमहाइपो क्लोराइट घोल का इस्तेमाल किया जाना है। ड्राइवर वाले कंपार्टमेंट की सफाई भी इसी घोल से करना है। कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव मरीजों को ट्रांसफर करने के बाद हर बार यही प्रोसेस अपनानी है। श्योपुर:पुलिस शौच के लिएबाहर नहीं जाने दे रही मध्य प्रदेश के ही श्याेपुर जिले का बड़ौदा कस्बा अभीकंटेनमेंट जोन है,ऐसे मेंयहां लाेगाें काे अजीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां करीब95% घराें में शौचालय नहीं बने हैं। पुलिस प्रशासन ने दाे दिन से लाेगाें पर शौच के लिए बाहर जाने पर राेक लगा दी है। पुलिसकर्मियों ने बुधवार काे भी शौच करने के लिए जा रहे लाेगाें काे वापस घर भेज दिया। इस पर लाेगाें की पुलिस के साथ बहस भी हुई। यहां 20 परिवार रह रहे हैं। इनमें सिर्फ संक्रमित मिले मांगीलाल और उनके पड़ोसी चंदू माहवार के मकान में ही शौचालय है, अन्य 18 परिवारों के घरों में शौचालय नहीं हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें यह तस्वीर इंदौर के एक हॉस्पिटल की है। यहां कोरोना संदिग्धों के स्वाब के सैंपल थर्मोकोल के डिब्बे में पानी के पाउच के साथ रखे हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के हिसाब से इन्हें जैल वाले आइस पैक में रखना होता है। - Breaking News Today: Aaj ka breaking news

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11 जून 2020

इंदौर में पानी के पाउच के साथ जा रहे सैंपल; पब्लिक टॉयलेट के पानी से धोई जा रही एम्बुलेंस मध्य प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए जुगाड़ व्यवस्था चलाई जा रही है।इंदौर में जांच के लिएकोरोना सैंपल जैल वाले आइस पैक की जगह पानी के ठंडे पाउच के बीच रखकर भेजे जा रहे हैं।वहीं,कोरोना के पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों काे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली 108 एम्बुलेंस को सार्वजनिक शौचालय की टंंकी के पानी से धोया जा रहा है। उधर, श्योपुर जिलेके कंटेनमेंट जाेन में पुलिस दाे दिन से लाेगाें कोशौच के लिए बाहर नहीं जाने दे रही, जबकि यहां करीब 95%घराें में पक्केशौचालय नहींहैं। आईस पैक खरीदे ही नहीं इंदौर में कोरोना जांच के लिएस्वास्थ्य विभाग नेसैंपल कलेक्शन के लिए जैल वाले आइस पैक की खरीदी ही नहीं की। वैक्सीनेशन के लिए मिले आइस पैक से ढाई महीने तक काम चलाया। स्टॉक में जितना था, उतना उपयोग करने के बाद स्वास्थ्य केंद्रों से मंगवाने लगे। अब कमी हुई तो जुगाड़ से काम चला रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सैंपल जैलपैक में जाए डब्ल्यूएचओ के अनुसारनाक और गले से स्वाब का सैंपल लेने के बाद उसे शीशी में सील करना होता है। शीशी कंटेनर में रखी जाती है। कंटेनर को जिप लॉक वाले प्लास्टिक के पैकेट में रखकर जार में रखा जाता है। कोरोेना सैंपल को ठंडा रखने के लिए जार काे जैल आइस पैक वाले थर्मोकोल बॉक्स में रखना होता है। जिसका तापमान 2 से 8 डिग्री के बीच रहे। शौचालय के पानी से धो रहे एम्बुलेंस इंदौर में दूसरी लापरवाही कोरोना के पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों काे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली 108 एम्बुलेंस को लेकर सामने आई है। हाल में अमेरिका से लौटे लोगों को लेने के लिए एम्बुलेंस एयरपोर्ट पर पहुंची तो उन्होंने एम्बुलेंस में धूल और गंदगी पर आपत्ति ली। तब पता चला कि एम्बुलेंस को सोडियमहाइपो क्लोराइटकी बजाय शौचालय के पानी से धोया जाता है। स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम का कहना है एम्बुलेंस का संचालन करने वाली जिगित्सा हेल्थकेयर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। फोटो इंदौर एयरपोर्ट के पास की है। यहां सार्वजनिक शौचालय की टंंकी के पानी से एम्बुलेंस को धोया जा रहा है। एनएचएम की गाइडलाइन के अनुसार एम्बुलेंस को रोज धोना चाहिए। इसके लिए 1 से 2 प्रतिशत सोडियमहाइपो क्लोराइट घोल का इस्तेमाल किया जाना है। ड्राइवर वाले कंपार्टमेंट की सफाई भी इसी घोल से करना है। कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव मरीजों को ट्रांसफर करने के बाद हर बार यही प्रोसेस अपनानी है। श्योपुर:पुलिस शौच के लिएबाहर नहीं जाने दे रही मध्य प्रदेश के ही श्याेपुर जिले का बड़ौदा कस्बा अभीकंटेनमेंट जोन है,ऐसे मेंयहां लाेगाें काे अजीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां करीब95% घराें में शौचालय नहीं बने हैं। पुलिस प्रशासन ने दाे दिन से लाेगाें पर शौच के लिए बाहर जाने पर राेक लगा दी है। पुलिसकर्मियों ने बुधवार काे भी शौच करने के लिए जा रहे लाेगाें काे वापस घर भेज दिया। इस पर लाेगाें की पुलिस के साथ बहस भी हुई। यहां 20 परिवार रह रहे हैं। इनमें सिर्फ संक्रमित मिले मांगीलाल और उनके पड़ोसी चंदू माहवार के मकान में ही शौचालय है, अन्य 18 परिवारों के घरों में शौचालय नहीं हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें यह तस्वीर इंदौर के एक हॉस्पिटल की है। यहां कोरोना संदिग्धों के स्वाब के सैंपल थर्मोकोल के डिब्बे में पानी के पाउच के साथ रखे हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के हिसाब से इन्हें जैल वाले आइस पैक में रखना होता है।

मध्य प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए जुगाड़ व्यवस्था चलाई जा रही है।इंदौर में जांच के लिएकोरोना सैंपल जैल वाले आइस पैक की जगह पानी के ठंडे पाउच के बीच रखकर भेजे जा रहे हैं।वहीं,कोरोना के पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों काे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली 108 एम्बुलेंस को सार्वजनिक शौचालय की टंंकी के पानी से धोया जा रहा है। उधर, श्योपुर जिलेके कंटेनमेंट जाेन में पुलिस दाे दिन से लाेगाें कोशौच के लिए बाहर नहीं जाने दे रही, जबकि यहां करीब 95%घराें में पक्केशौचालय नहींहैं।

आईस पैक खरीदे ही नहीं

इंदौर में कोरोना जांच के लिएस्वास्थ्य विभाग नेसैंपल कलेक्शन के लिए जैल वाले आइस पैक की खरीदी ही नहीं की। वैक्सीनेशन के लिए मिले आइस पैक से ढाई महीने तक काम चलाया। स्टॉक में जितना था, उतना उपयोग करने के बाद स्वास्थ्य केंद्रों से मंगवाने लगे। अब कमी हुई तो जुगाड़ से काम चला रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक सैंपल जैलपैक में जाए

डब्ल्यूएचओ के अनुसारनाक और गले से स्वाब का सैंपल लेने के बाद उसे शीशी में सील करना होता है। शीशी कंटेनर में रखी जाती है। कंटेनर को जिप लॉक वाले प्लास्टिक के पैकेट में रखकर जार में रखा जाता है। कोरोेना सैंपल को ठंडा रखने के लिए जार काे जैल आइस पैक वाले थर्मोकोल बॉक्स में रखना होता है। जिसका तापमान 2 से 8 डिग्री के बीच रहे।

शौचालय के पानी से धो रहे एम्बुलेंस

इंदौर में दूसरी लापरवाही कोरोना के पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों काे अस्पतालों तक पहुंचाने वाली 108 एम्बुलेंस को लेकर सामने आई है। हाल में अमेरिका से लौटे लोगों को लेने के लिए एम्बुलेंस एयरपोर्ट पर पहुंची तो उन्होंने एम्बुलेंस में धूल और गंदगी पर आपत्ति ली। तब पता चला कि एम्बुलेंस को सोडियमहाइपो क्लोराइटकी बजाय शौचालय के पानी से धोया जाता है। स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम का कहना है एम्बुलेंस का संचालन करने वाली जिगित्सा हेल्थकेयर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।

फोटो इंदौर एयरपोर्ट के पास की है। यहां सार्वजनिक शौचालय की टंंकी के पानी से एम्बुलेंस को धोया जा रहा है।

एनएचएम की गाइडलाइन के अनुसार एम्बुलेंस को रोज धोना चाहिए। इसके लिए 1 से 2 प्रतिशत सोडियमहाइपो क्लोराइट घोल का इस्तेमाल किया जाना है। ड्राइवर वाले कंपार्टमेंट की सफाई भी इसी घोल से करना है। कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव मरीजों को ट्रांसफर करने के बाद हर बार यही प्रोसेस अपनानी है।

श्योपुर:पुलिस शौच के लिएबाहर नहीं जाने दे रही

मध्य प्रदेश के ही श्याेपुर जिले का बड़ौदा कस्बा अभीकंटेनमेंट जोन है,ऐसे मेंयहां लाेगाें काे अजीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां करीब95% घराें में शौचालय नहीं बने हैं। पुलिस प्रशासन ने दाे दिन से लाेगाें पर शौच के लिए बाहर जाने पर राेक लगा दी है। पुलिसकर्मियों ने बुधवार काे भी शौच करने के लिए जा रहे लाेगाें काे वापस घर भेज दिया। इस पर लाेगाें की पुलिस के साथ बहस भी हुई।

यहां 20 परिवार रह रहे हैं। इनमें सिर्फ संक्रमित मिले मांगीलाल और उनके पड़ोसी चंदू माहवार के मकान में ही शौचालय है, अन्य 18 परिवारों के घरों में शौचालय नहीं हैं।



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यह तस्वीर इंदौर के एक हॉस्पिटल की है। यहां कोरोना संदिग्धों के स्वाब के सैंपल थर्मोकोल के डिब्बे में पानी के पाउच के साथ रखे हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के हिसाब से इन्हें जैल वाले आइस पैक में रखना होता है।


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