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<p style="text-align: justify;"><strong>Chandrayaan-3 Mission Update: </strong>भारत का चंद्रयान-3 मिशन का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) चांद के और करीब पहुंच गया है. इसरो ने रविवार (20 अगस्त) को कहा कि लैंडर मॉड्यूल को कक्षा में थोड़ा और नीचे सफलतापूर्वक पहुंचा दिया और इसके अब बुधवार (23 अगस्त) को शाम छह बजकर चार मिनट पर चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है.</p> <p style="text-align: justify;">चंद्रयान-3 मिशन को लेकर स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी के निदेशक के राजीव ने रविवार को कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की निर्धारित सॉफ्ट लैंडिंग का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. के राजीव चंद्रयान-3 मिशन का हिस्सा हैं. डॉ. राजीव ने स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी)/केरल विश्वविद्यालय से भौतिकी में पीएचडी हासिल की है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>"लैंडिंग के बाद ही मिलेगा असली फल"</strong></p> <p style="text-align: justify;">के राजीव ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि आने वाले दो दिन बेहद अहम हैं क्योंकि अब हम पावर डिसेंट और फिर नेविगेशन के लिए जाएंगे और लैंड़र सतह पर धीमी गति से उतरेगा. इसलिए ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है. हालांकि मिशन का असली फल तो सुरक्षित लैंडिंग के बाद ही मिलेगा. जब रोवर चांद पर मौजूद मिनरल्स की खोज करेगा. हम बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>चंद्रमा पर मौजूद खनिजों की मिली जानकारी</strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने इस पूरे मिशन, लैंडर और रोवर के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि रोवर के पेलोड चंद्रमा पर मौजूद खनिजों के प्रकार को जानने में मदद करेंगे. चंद्रयान-2 का लैंडर अभी भी परिक्रमा कर रहा है और हमें डेटा मिल रहा है. </p> <p style="text-align: justify;">के राजीव ने आने वाले दूसरे मिशन को लेकर कहा कि साइंस तो जारी रहेगा, लेकिन इसरो किस प्रकार का मिशन शुरू करेगा, ये सरकार की प्राथमिकताओं के साथ-साथ हमारी क्षमता और वैज्ञानिक रुचि के आधार पर तय किया जाना चाहिए. मैं आपको तुरंत ये नहीं बता पाऊंगा कि आने वाले मिशन क्या होंगे, लेकिन आप उम्मीद कर सकते हैं कि विज्ञान कभी नहीं रुकेगा. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>सॉफ्ट लैंडिंग को माना जाता है मुश्किल</strong></p> <p style="text-align: justify;">इसरो इनर्शियल सिस्टम यूनिट के निदेशक पद्मकुमार ईएस ने भी एएनआई से बात की. उन्होंने कहा कि मिशन में गलती के लिए बेहद कम जगह होती है इसलिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है. इसी वजह से सॉफ्ट लैंडिंग को हासिल करना बहुत कठिन काम माना जाता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया लैंडर का नाम</strong></p> <p style="text-align: justify;">इसरो ने चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को लॉन्च किया था. चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर का नाम विक्रम साराभाई (1919-1971) के नाम पर रखा गया है, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है. </p> <p style="text-align: justify;">मिशन के प्रोपल्शन मॉड्यूल से विक्रम लैंडर 17 अगस्त को सफलतापूर्वक अलग हो गया था. रविवार रात को दूसरे और अंतिम डीबूस्टिंग (धीमा करने की प्रक्रिया) अभियान में लैंडर मॉड्यूल सफलतापूर्वक कक्षा में और नीचे आ गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें- </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Luna-25 Crash: लूना-25 के साथ चांद पर लैंडिंग से पहले आखिरी पलों में क्या हुआ? जानें कैसे हुआ क्रैश" href="https://ift.tt/V2aOxuF" target="_self">Luna-25 Crash: लूना-25 के साथ चांद पर लैंडिंग से पहले आखिरी पलों में क्या हुआ? जानें कैसे हुआ क्रैश</a></strong></p>
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21 अग॰ 2023
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Chandrayaan-3 के चांद पर उतरने का बेसब्री से इंतजार कर रहे ISRO के वैज्ञानिक, बोले- लैंडिंग के बाद मिलेगा असली फल
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