प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिभावकों को सलाह दी कि अभिभावकों को अपने बच्चे के रिपोर्ट कार्ड को सामाजिक अवसरों पर अपने ‘परिचय कार्ड’ के रूप में प्रयोग करना बंद कर देना चाहिए। मोदी ने बच्चे के शैक्षिक प्रदर्शन को उसकी सामाजिक स्थिति से जोडऩे के खिलाफ भी आगाह किया।
दो वर्षों में अपनी दूसरी ‘परीक्षा पे चर्चा’ संवाद में मंगलवार को करीब दो हजार छात्रों व शिक्षकों को संबोधित करते हुए मोदी ने छात्रों से अवसाद को हल्के में नहीं लेने और जरूरत पडऩे पर परामर्श लेने को कहा।
उनके साथ अपने दूसरे परीक्षा से पहले के संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने अवसाद को किनारे रखने के लिए छात्रों को एक कागज पर अपनी समस्याएं लिखने और उसके बारे में अपने दोस्तों को बताने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, ‘‘न अभिभावकों को, न छात्रों को और न ही शिक्षकों को, किसी को भी डिप्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्हें इसे अत्यंत प्राथमिकता देनी चाहिए।’’
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि छात्रों को किसी पाठ्यक्रम या कॉलेज में मात्र दाखिला नहीं लेना चाहिए बल्कि उन्हें स्पष्ट होना चाहिए कि वे क्या बनना चाहते हैं या जिंदगी में क्या हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर ऐसा होता है तो स्नातक बनाने वाली फैक्ट्रियां स्नातक बनाती रहेंगी, जिन्हें यह पता ही नहीं होगा कि उन्हें अपनी जिंदगी में क्या करना है।’’
प्रधानमंत्री नेपाल, रूस, नाइजीरिया और कुवैत जैसे कई देशों से छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए। छात्रों के सवाल पहले से रिकॉर्ड वीडियो के रूप में उनसे पूछे गए थे। हालांकि आयोजन में मौजूद कुछ छात्रों ने कई बार पुकारकर ‘सर’ कहा लेकिन वे मोदी से सवाल पूछने में नाकाम रहे।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सेंट्रल हिंदू स्कूल का एक छात्र जब सवाल पूछने के लिए खड़ा हुआ तो उसे उसके शिक्षकों और अधिकारियों ने बैठने के लिए कहा। यह संवाद देश के सभी सरकारी स्कूलों में सीधे प्रसारित किया गया था।
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