इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शिक्षक भर्ती में पासिंग मार्क बढ़ाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश को याचिका के अंतिम निपटारे तक बढ़ा दिया है। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि बच्चो की शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने क्वॉलिफाइंग अंको में बढ़ोत्तरी की है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार स्वयं ऐसे कार्य कर रही है जिससे बच्चो की शिक्षा और पढ़ाई बहुत अच्छी हो सके और स्कूलों को योग्य शिक्षक मिले।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ ने याची मोहम्मद रिजवान सहित कई शिक्षामित्रों की ओर से दायर याचिकाओं पर बुधवार को यह आदेश दिया। याचिका दायर कर सरकार द्वारा सहायक शिक्षकों की भर्ती में पैसठ और साठ प्रतिशत पासिंग अंक किए जाने के शासनादेश को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि यह शासनादेश शिक्षामित्रों के हितों के खिलाफ है । याचिका का कड़ा विरोध कर राज्य सरकार की ओर से कहा कि शिक्षा को उन्नत करने और शिक्षा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जारी शासनादेश सही है।
सरकार ने अपने जवाब में आगे कहा कि 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों को दो अवसर दिए जाने के आदेश दिए हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बच्चो को मिलने वाली शिक्षा से खिलवाड़ हो। गौरतलब है कि गत एक दिसम्बर को 69 हजार शिक्षको की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके लिए छह जनवरी को लिखित परीक्षा आयोजित की गई । गत 7 जनवरी को सरकार ने क्वालीफाईंग नम्बरो में बढ़ोत्तरी की। इस आदेश को चुनौती दी गई है। इस मामले में सुनवाई जारी है जो 31 जनवरी को भी होगी।
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